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कमाई 4 से 5 लाख. गांव में शुरू करें ये 4 बिज़नेस

Tuesday, February 5, 2019

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कमाई 4 से 5 लाख. गांव में शुरू करें ये 4 बिज़नेस. थोड़े निवेश में ज्यादा आमदनी. शुरू करें ये उद्योग होगी अच्छी कमाई. Top 4 Business Ideas

 

चॉक (Chalk Industry)

चॉक प्रत्येक स्कूल, कालेज एवं शिक्षा संस्थानों में काम आने वाली आवश्यक वस्तु है। स्कूल से लेकर विश्वविद्यालयों तक में चॉक का प्रयोग किया जाता है। भारत में स्कूलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और हर साल सैकड़ों नए स्कूल हर राज्य में खुल जाते हैं। इसलिए चॉको की मांग बराबर बढ़ती जा रही है। भारत में कई कारखाने चॉक बना रहे हैं, इस उद्योग से भी अच्छा लाभ प्राप्त होने की सम्भावना है। चॉक बनाने का काम काफी आसान है। आज भी भारत में कर्इ कारखानो में चॉक बनाया जा रहा हैं, लेकिन फिर भी इस उद्योग को अच्छा लाभ मिलने पूरी सम्भावना है। साथ ही ये काम बहुत अधिक शाररिक श्रम भी नहीं मांगता। चॉक बनाने का काम काफी आसान व सुगम हैं। इस उद्योग को घरेलू तथा कुटीर उद्योग के रूप में भी प्रारम्भ किया जा सकता है। साथ ही ये उद्योग महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकता हैं। कम श्रम का होने के कारण इस कार्य को करने में महिलाओं की सहायता ली जा सकती हैं। महिलाऐं घर पर ही इस उद्योग को विभिन्न सामाजिक व सरकारी संगठन की सहायता से शुरू कर सकती हैं।

कच्चा माल (Raw Material)

चॉक मुख्य रूप से प्लास्टर ऑफ पेरिस (Plaster of Paris) से बनाये जाते हैं। यह सफेद रंग का पाउडर होता है। यह वास्तव में एक प्रकार की मिट्टी है जिसे जिप्सम (Gypsum) नामक पत्थर से तैयार किया जाता है। आजकल जिप्सम को भूनने के लिए जिप्सम रोस्टर का प्रयोग किया जाता है।

जिप्सम रोस्टर ग्रीस या मोबिल ऑयल के खाली ड्रम से बन सकता है। इस ड्रम के अन्दर एक इंच व्यास का पाइप निकाल कर इसको ड्रम के साथ वैल्ड करवा दिया जाता है। ड्रम में लगभग 8 इंच चौकोर मुंह काटकर उस पर ढक्कन लगवा दिया जाता है। इस ड्रम को पाइप के साथ बियरिंग पर टिका दिया जाता है। ड्रम के नीचे आग जलाते हैं और ड्रम को घुमाते रहते हैं। जब जिप्सम भुन जाता है तो ड्रम का मुंह खोलकर निकाल लेते हैं। फिर डिसइन्टीग्रेटर मशीन में बारीक पीस लिया जाता है।

चॉक बनाने का यन्त्र

चॉक बनाने के लिए किसी मशीन की जरूरत नहीं पड़ती। इनको गन मैटल या अल्यूमीनियम के सांचों में बनाया जाता है।

मशीन एवं उपकरणः

·        जिप्सम रोस्टर (Gypsum Roaster)

·        ग्राइन्डर या चक्की (Grinder)

·        स्क्रीन (Screen)

·        मिक्सिंग टैंक (Mixing Tank)

·        सांचा (Frame)

उत्पादन विधि (Manufacturing Process)

चॉक बनाने की तरकीब बड़ी आसान है। थोड़े से प्लास्टर ऑफ पेरिस में पानी डालकर हाथ से या लकड़ी के पतले तख्ते से चलाया जाता है। जब यह मिलकर लेई (Paste) जैसी बन जाय तो सांचे के ऊपर इस तरह डाला जाता है कि सब छेदों में यह भर जाए। सांचे में यह मिश्रण भरने से पहले सांचे के छेदों में हल्का सा मोबिल ऑयल या 4 भाग मिट्टी के तेल में एक भाग मूंगफली का तेल मिलाकर बनाया हुआ तेल रूई की फुरैरी से लगा दिया जाता है। ऐसा करने से चॉक छेद में चिपकता नहीं है। सांचे में 15-20 मिनट में ही प्लास्टर सूखकर जम जाता है, तब सांचे को खोलकर चॉक को निकाल दिया जाता है। इन्हें धूप में सूखने को रख दिया जाता है। अगर पानी में प्लास्टर ऑफ पेरिस मिलाने से पहले थोड़ा सा नील मिला दिया जाय तो चॉक की सफेदी खूब निखर आती है।

चॉक ठीक बनी या नहीं:

चॉक का प्रयोग ब्लैक बोर्ड पर लिखने में होता है, अतः ब्लैक बोड पर ठीक तरह लिखने में बहुत घिसता है या लिखते समय वह टूटने लगता है तो समझ लें कि प्लास्टर ऑफ पेरिस खराब और कमजोर क्वालिटी का है, अतः दूसरी अच्छी क्वालिटी का प्रयोग करें। इसके विपरीत अगर चॉक बोर्ड पर ठीक तरह न लिखे, अर्थात् सख्त हो तो इसमें चीनी मिट्टी की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए। जब सन्तुष्ट हो जाएं कि चॉक ठीक बने हैं तभी बाजार में बेचने को भेजना चाहिए।

चॉक की पैकिंग:

चॉक पैक करने के लिए 227 ग्राम वजन वाले गते के डिब्बे बनाये जाते हैं और प्रत्येक डिब्बे में 100 चाक रखे जाते हैं ।

 

Project Cost Estimation of Chalk Unit:

उत्पादन क्षमता (Production of Capacity):                                    54,000कि.ग्रा.

भूमि एवं भवन (Land and Building):                                 200वर्ग मीटर

मशीन एवं उपकरण (Machinery and Equipment):             1.2लाख

कुल अनुमानित लागत (Estimated Capital Investment):    9.5 लाख

 

ऑफिस पेस्ट (Office Paste), गोंद की बोतल, ग्लू बॉटल

ऑफिस पेस्ट का उपयोग कार्यालयों, कॉलेजों और बैंकों में महत्वपूर्ण दस्तावेजों और फाइलों को सील और पैकेजिंग के लिए किया जाता है।

फॉर्मूला नं.1

संघटक (Ingredients)

मात्रा (भागमें)

कैल्शियम क्लोराइड (25% घोल)

25

पोटैटो (आलू) का स्टार्च

5

पानी (गर्म)

20

 

पहले दोनों रचकों को ठंडा ही आपस में मिलाकर 65% सेन्टी. तक गर्म किया जाता है और उस समय तक बराबर चलाते रहना चाहिए जब तक यह स्वच्छ होकर इसमें की गाठें खत्म न हो जाएं। अब इसमें गर्म पानी डालकर पतला कर लिया जाता है।

फॉर्मूला नं.2

संघटक (Ingredients)

मात्रा (किलो में)

आलू का स्टार्च

13

पानी

80

कास्टिक सोडा लाई 370 बॉमी

3

नाइट्रिक एसिड 240 बॉमी

3

फॉर्मफिल्डहाइड या फेनोल

1

 

विधि:

भाग के रचकों को ठंडा ही मिलाकर धीरे-धीरे गर्म कर के पकाया जाता है यहां तक कि स्वच्छ पेस्ट बन जाय । इसमें नाइट्रिक एसिड 240 बॉमी मिलाकर उदासीन बना लिया जाता है और फफूंद लगने से बचाने के लिए इसमें फॉर्मफिल्डहाइड या फेनोल मिलाया जाता है।

मशीन एवं उपकरणः

·        मिक्सर (स्टेनलेस स्टील का बना हुआ, स्टिरर लगा हुआ) (Mixing Machine)

·        वाटर-बाथ (Water Bath)

·        भट्टी (Furnace)

 

Project Cost Estimation of Office Paste:

उत्पादन क्षमता (Production of Capacity):                                    1, 50,000दर्जन बोतल प्रतिवर्ष

भूमि एवं भवन (Land and Building):                                 400वर्ग मीटर

मशीन एवं उपकरण (Machinery and Equipment):             3.2लाख

कुल अनुमानित लागत (Estimated Capital Investment):    14 लाख

 

 

फेस पाउडर (Face Powder)

सम्पूर्ण सौंदर्य प्रसाधन समूह में फेस पाउडर का इस्तेमाल निःसंदेह ही सबसे अधिक होता है। सिर्फ स्त्रियां ही नहीं पुरुष भी टैल्कम पाउडर (Talcum Powder) विशेष रूप से मिश्रित (Copounded) फेस पाउडर उपयोग करते हैं।

फेस पाउडर का निर्माण इस समय कई जानी-मानी कम्पनियों के द्वारा किया जाता है। परन्तु लघु उद्योग में भी इसका उत्पादन सम्भव है। सावधानी बरतने की बात यह है कि पाउडर की गुणदत्ता (Quality) बरकरार (Maintain) करने के लिए इसके उत्पादन में विशुद्ध संघटक (Purified Ingredient) अनुमोदित रंग (Approved Color) एवं अनुकूल सुगंधि (Non-Irritating Perfume) का उपयोग करना चाहिए। क्योंकि उत्पादित पदार्थ लगातार प्रयोग करने पर भी शरीर के ऊपर किसी प्रकार का कुप्रभाव (Bad Effect) न डाले। इसके साथ ही स्त्रियों की आकांक्षा (Requirement) को प्रमुखता के साथ ध्यान में रखते हुए उत्पादित करना चाहिए।

फेस पाउडर में निम्न गुण होने चाहिए:

·        कवरिंग पावर (Covering Power)

·        स्लिप (Slip)

·        एढहैसिवनेस (Adhesiveness)

·        ऐबजॉर्पसन (Absorption)

·        रंग तथा सुगंधि (Color & Perfume)

स्किन केयर उद्योग एफएमसीजी क्षेत्र का एक हिस्सा है, और इसे भारत में तेजी से बढ़ते गतिशील बाजारों में से एक माना जाता है। भारतीय लोगों के सामने आने वाली आम त्वचा की समस्याएं त्वचा का काला पड़ना, रूखी त्वचा, मुँहासे के धब्बे और सनबर्न हैं। इसके अलावा, यूवी किरणों और त्वचा पर अन्य जलवायु कारकों के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता उपभोक्ता को त्वचा की आवश्यकताओं के अनुसार कॉस्मेटिक उत्पादों के बारे में अधिक निर्दिष्ट करती है।

इंडिया स्किन केयर मार्केट पिछले पांच वर्षों से 16.4% की सीएजीआर के साथ बढ़ रहा है और बढ़ती व्यक्तिगत देखभाल, ब्रांड जागरूकता, डिस्पोजेबल आय में वृद्धि, मध्यम वर्ग के लोगों में बढ़ती मांग और सस्ती कीमत के कारण वर्ष 2021 तक दोगुने से अधिक लाभ प्राप्त करने का अनुमान है। व्यक्तिगत देखभाल को ध्यान में रखते हुए, युवाओं, महिलाओं, पुरुषों आदि ने स्किन केयर बाजार को बिक्री को प्रमुखता से बढ़ाया है।

ग्लोबल स्किन केयर प्रोडक्ट्स मार्केट ने 2016 में $ 136,304 मिलियन का राजस्व उत्पन्न किया, और 2024 तक $ 194,961 मिलियन तक पहुंचने के लिए 4.5% की सीएजीआर से बढ़ने की उम्मीद है।

 

कच्चा माल (Raw Material)

1.         कवरिंग पावर:                 टिटानियम डाइऑक्साइड (TiO2), जिंक ऑक्साइड (ZnO), जिंक सल्फाइड (ZnS), लिथोपोन (Lithopene) केओलिन (Kaolin-Colloidal), कैल्शियम सल्फेट (CaSo4), मैगनेशियम डाइऑक्साइड (MgO), स्टार्च (Starch)

2.         स्लिप (Slip):                  टैल्क (Talc), स्टार्च (Starch), मेटालिक सोप (Metallic Soap)

3.         एढहैसिवनेस (Adhesiveness):     कैल्शियम (Calcuim), मैगनेशियम (Magnesium) व जिंक (Zinc) स्टियरेट (Stearate) स्टार्च, शुद्धिकृत (Purified) केओलिन

4.         ऐबजॉर्पसन (Absorption):                        प्रेसिपिटेटेड चॉक (Precipated Chalk), मैग्नेशियम कार्बोनेट (Magnesium Carbonate) स्टार्च, शुद्धिकृत (Purified) केओलिन

निष्कर्ष के तौर पर यह ध्यान देने की आवश्यकता है कि फेस पाउडर के उत्पादन में उच्च क्वालिटी के बारीक तथा सफेद कच्चे माल का प्रयोग करना चाहिए। इन उच्च दरजे (High Grade) के कच्चे माल का वर्णन निम्न हैं:

ज़िंक ऑक्साइड:              अति बारीक, सफ़ेद

टैल्क:                            अति बारीक सफेद जिसका 99 प्रतिशत मात्रा 220 मैश (Mesh) से पास कर जाये।

जिंक स्टियरेट:                 अति सफेद दरजा का ट्रिपल प्रेस्ड स्टियरिक एसिड से निर्मित तथा गंधमुक्त

प्रेसिपिटेटेड चॉकः            अति हल्का तथा सफेद दरजा

मैगलेशियम कार्बोनेट:         हल्का तथा सफेद ग्रेड

टिटानियम डाइऑक्साइड:  200 मैश का बारीक तथा उत्तम क्वालिटी का

 

उत्पादन विधि (फेस पाउडर)

(Manufacturing Process of Face Powder)

एक उपयुक्त बर्तन में मैगनेशियम कार्बोनेट या चॉक का कुछ भाग लेकर उसमें सुगंधि कम्पाउंड मिला लिया जाता है। जब तेल उसमें अवशेषित हो जाये तो मिश्रण को ब्रिस्टिल ब्रश के सहारे हैंड सीव के ऊपर रगड़ा जाता है या पाउडर ब्रश सिफ्टर से होकर पास कराया जाता है। सब सुगंधि पूर्ण रूप से मिश्रित हो जाये तो चलाना बंद कर दिया जाता है। बचे हुए मैगनेशियम कार्बोनेट या चॉक में भी उपर्युक्त विधि से रंग मिलाकर मिश्रण को एक रूप कर लिया जाता है। इसके बाद अन्य कच्चे माल को निश्चित मात्रा के अनुपात में एक मिक्सर में लिया जाता है। इसमें उपयुक्त तैयार किये गये सुगंधि बेस ; तथा रेग बेस को मिलाकर मिश्रण को समरूप बना लिया जाता है।

उपर्युक्त समरूप किये गये मिश्रण को एक फैन तथा साइक्लोन सैपरेट युक्त मिल में ग्राइंड किया जाता है। इस ग्राउंड किये गये पाउडर को माइक्रोनाइज़र के सहारे अपेक्षित साइज का कर लिया जाता है। एयर स्पिनिंग प्रोसेस के द्वारा पाउडर को उच्च हवा दबाव पर एक विशेष प्रकार के निर्मित वैसल में चींवात गति (Whirling Motion) दी जाती है, जिससे पाउडर के कण आपस में अत्यधिक वेग के साथ टकराकर बहुत बारीक कण में परिवर्तित हो जाता है। अपेक्षित बारीक कण को एक सिलिंडर से होकर सेन्ट्रिफ्यूगल फोर्स के सहारे पास किया जाता है। मोटा कण तब तक उस सिलिंडर से होकर नहीं गुजर पाता, जब तक कि काफी बारीक नहीं हो जाये। इसे आकर्षक पैकिंग करके मार्केटिंग किया जाता है।

Project Cost Estimation of Face Powder:

उत्पादन क्षमता (Production of Capacity):                                    30,000कि.ग्रा. प्रतिवर्ष

भूमि एवं भवन (Land and Building):                                 400वर्ग मीटर

मशीन एवं उपकरण (Machinery and Equipment):             3.2लाख

कुल अनुमानित लागत (Estimated Capital Investment):    14 लाख

 

 

कोल्ड क्रीम (Cold Cream)

वर्तमान युग में कोल्ड क्रीम बहुत ही प्रचलित एवं लोकप्रिय सौंदर्य प्रसाधन है। इसका प्रयोग स्त्री पुरुष दोनों ही करते हैं। लेकिन स्त्रियों के लिए यह विशेष आकर्षण की चीज है। इसे चेहरे पर अच्छी तरह से मालिश कर लेने से त्वचा मुलायम होती है और लोच (Softness) आती है, तथा रूखापन मिट जाता है। इसे चेहरे पर लगाने से हल्का ठंडा महसूस होता है। इसका कारण यह हे कि इसमें पानी की मात्रा मौजूद होती है जो धीरे-धीरे वाष्पीकृत होती है जिससे चेहरा ठंडा रहता है।

आज के परिवेश में जहां प्रदूषण का स्तर बहुत अधिक है, त्वचा की सेहत बनाए रखने की आवश्यकता के कारण वैश्विक त्वचा देखभाल उत्पादों के बाजार में माँग बढ़ने का अनुमान है। लोगों में आत्म-चेतना बढ़ रही है और उनकी बदलती जीवन शैली वैश्विक त्वचा देखभाल उत्पादों के बाजार में माँग को बढ़ाने वाले अन्य कारक हो सकते हैं।

स्वस्थ त्वचा के बारे में बढ़ती चेतना, विकासशील देशों की आर्थिक स्थिति में सुधार, वृद्ध लोगों की बढ़ती आबादी और दुनिया भर में त्वचा देखभाल उत्पादों की एक किस्म की मांग में लगातार वृद्धि जैसे कारक वैश्विक त्वचा देखभाल उत्पादों की आशाजनक विकास संभावनाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।

बदलती जीवन शैली और तेजी से शहरीकरण के कारण, पूर्वानुमान के दौरान त्वचा देखभाल उत्पादों के बाजार में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी जा सकती है।

कच्चा माल (Raw Material)

·        मक्खी मोम बोरेक्स (Bee wax)

·        मिनरल ऑयल (Mineral Oil)

·        स्रावित जल (Distilled Water)

·        बोरेक्स (Borax)

·        पैराफिन मोम (Paraafin Wax)

·        सेरेसिन (Ceresin)

·        स्पेर्मासिटी (Spermaceti)

·        सुगन्धि (Perfume)

 

मशीन एवं उपकरणः

·        मेल्टिंग टैंक (Melting Tank)

·        टिल्टिंग टाइप मिक्सिंग मशीन

·        भट्टी (Furnace)

·        स्टोरेज बैंक, स्टेनलेस स्टील का

 

बनाने की विधि

कोल्ड क्रीम के उत्पादन के लिए एक वाटर जैकेटेड मिक्सिंग मशीन में मोम को पहले डाल दिया जाता है। मशीन को फरनेस या उसमें लगे हीटर के सहारे गर्म किया जाता है। इससे जैकेट के अन्दर रखा पानी गर्म होता है जिससे बर्तन में रखा मोम गर्म होकर पिघल जाता है। अब इसमें द्रव पैराफिन मिलाकर 800 सें.ग्रे. तक गर्म किया जाता है। स्टैनलेस स्टील के दूसरे बर्तन में पानी डालकर गर्म करते हैं तथा इसमें सुहागा (Borax) अथवा अन्य एमलशन बनाने में सहायक केमिकल जैसे कास्टिक पोटाश या ट्राईइथानोलएमाइन आदि मिला देते हैं। इस मिश्रण को भी 800 तक गर्म करते हैं। इस मिश्रण को मोम वाले मिश्रण में मिलाकर मशीन को चला दिया जाता ह, जिससे उसमें लगे ब्लेड के तेजी से घूमने से उसमें रखे पदार्थ अच्छी तरह मिश्रित हो जाते हैं। जब क्रीम तैयार हो जाती है तो उसे ठंडा करके उसमें सुगन्धि (Essence) मिलाकर धीरे-धीरे मशीन को चलाकर मिलाया जाता है। इसके बाद तैयार क्रीम को, मशीन को झुकाकर, दूसरे बर्तन में निकाल लिया जाता है। इसे बाजार के उपभोक्ता मांग के अनुसार आकर्षक पैकिंग किया जाता है। इसके बाद यह बिक्री के लिए तैयार हो जाता है।

 

 

 

Project Cost Estimation of Cold Cream Unit:

उत्पादन क्षमता (Production of Capacity):                                    3 लाख पैक प्रतिवर्ष

भूमि एवं भवन (Land and Building):                                 500वर्ग मीटर

मशीन एवं उपकरण (Machinery and Equipment):             5लाख

 

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